दोस्तो,
रटलाई एक कस्बा है जोकि राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है ।
अब हम आपको रटलाई के बारे में तथा केसे रटलाई का नाम तांत्रिक नगरी है बताते हैं बहुत सालों पहले रटलाई में कई तरह के जादू मंत्र ,अघोरी विद्या ,तथा नजरबंदी जैसे कई तंत्र विद्यमान थे ।
कम से कम 450 साल पहले ढाका बंगाल से गंगली तेलन ,कपुरी धोबन ,लाली लवारन,लूणी चमारण,रानी भानमती,अस्मालया जोगी नामक जदुगारो ने 143 मंदिरों को विश्व भ्रमण पर उड़ाया ,बहुत सारे मंदिर अनेकों जगह पर जादूगरों द्वारा उतार लिए गए इसी तरह रटलाई में माली समुदाय की ओरत जोकि मूल ढाका की ही थी ,उसको रटलाई के एक पुरुष द्वारा ढाका से शादी करके लाया गया था उसने बंगाली विद्या सीख रखी थी ।तथा उसने है यह रटलाई में स्थित प्राचीन उल्टा मंदिर उतारा था । आज भी यह मंदिर रटलाई के सब्जी मंडी में पानी की टंकी व पंचायत भवन के पास स्थित है यह मंदिर उल्टा उतारा गया था आज भी इसे उल्टे मंदिर के नाम से जाना जाता है ।
इस मंदिर में महाकाली कि नग्न मूर्ति ,काला गोरा भेरू तथा अनेक देवता विद्यमान है ।आज भी इसके चर्चे बुजुर्गो द्वारा सुने जा सकते है ।
रटलाई गांव ऐसी अनेकों विविध ऐतिहासिक तथ्यों से पूर्ण है । रटलाई में बहुत पहले लगभग 1800 ई. में मात्रा कुछ ही लोग निवास करते थे सब लोग केवल जो अभी उचाई पर स्थित वास है वहीं लोग यहां के स्थाई निवासी है । रटलाई के आस पास पहले बहुत सारा जंगल था तथा शेरों बहुत ज्यादा थे ।उस समय के लोग भी बहुत ज्यादा तांत्रिक थे वे शेर का मुंह मंतरो द्वारा बंद कर देते थे ताकि शेर किसी को खा नहीं सके ।लोगो का प्रमुख व्यवसाय कृषि व पशुपालन था एक ही फसल बोई जाती थी।राजाओं का शासन था ।पानी कुओ से लाया जाता था। संयुक्त परिवार की प्रथा थी पिता परिवार का मुखिया था । यहां पर एक नदी बहती है जिसका नाम उजाड़ नदी है जो कालीसिंध में मिलती है । यह रटलाई की बहुत महत्वपूर्ण एवं एकमात्र नदी है।
रटलाई एक कस्बा है जोकि राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है ।
अब हम आपको रटलाई के बारे में तथा केसे रटलाई का नाम तांत्रिक नगरी है बताते हैं बहुत सालों पहले रटलाई में कई तरह के जादू मंत्र ,अघोरी विद्या ,तथा नजरबंदी जैसे कई तंत्र विद्यमान थे ।
कम से कम 450 साल पहले ढाका बंगाल से गंगली तेलन ,कपुरी धोबन ,लाली लवारन,लूणी चमारण,रानी भानमती,अस्मालया जोगी नामक जदुगारो ने 143 मंदिरों को विश्व भ्रमण पर उड़ाया ,बहुत सारे मंदिर अनेकों जगह पर जादूगरों द्वारा उतार लिए गए इसी तरह रटलाई में माली समुदाय की ओरत जोकि मूल ढाका की ही थी ,उसको रटलाई के एक पुरुष द्वारा ढाका से शादी करके लाया गया था उसने बंगाली विद्या सीख रखी थी ।तथा उसने है यह रटलाई में स्थित प्राचीन उल्टा मंदिर उतारा था । आज भी यह मंदिर रटलाई के सब्जी मंडी में पानी की टंकी व पंचायत भवन के पास स्थित है यह मंदिर उल्टा उतारा गया था आज भी इसे उल्टे मंदिर के नाम से जाना जाता है ।
इस मंदिर में महाकाली कि नग्न मूर्ति ,काला गोरा भेरू तथा अनेक देवता विद्यमान है ।आज भी इसके चर्चे बुजुर्गो द्वारा सुने जा सकते है ।
रटलाई गांव ऐसी अनेकों विविध ऐतिहासिक तथ्यों से पूर्ण है । रटलाई में बहुत पहले लगभग 1800 ई. में मात्रा कुछ ही लोग निवास करते थे सब लोग केवल जो अभी उचाई पर स्थित वास है वहीं लोग यहां के स्थाई निवासी है । रटलाई के आस पास पहले बहुत सारा जंगल था तथा शेरों बहुत ज्यादा थे ।उस समय के लोग भी बहुत ज्यादा तांत्रिक थे वे शेर का मुंह मंतरो द्वारा बंद कर देते थे ताकि शेर किसी को खा नहीं सके ।लोगो का प्रमुख व्यवसाय कृषि व पशुपालन था एक ही फसल बोई जाती थी।राजाओं का शासन था ।पानी कुओ से लाया जाता था। संयुक्त परिवार की प्रथा थी पिता परिवार का मुखिया था । यहां पर एक नदी बहती है जिसका नाम उजाड़ नदी है जो कालीसिंध में मिलती है । यह रटलाई की बहुत महत्वपूर्ण एवं एकमात्र नदी है।